रेडी टू मूव फ्लैट खरीदें या अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी दोनों के फायदे जानकर तय करें कौन-सा विकल्प बेहतर

रेडी टू मूव और अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी में सबसे बड़ा अंतर इनकी कीमतों को लेकर होता है. वहीं पजेशन भी एक अहम फैक्टर होता है. इन दोनों तरह के विकल्पों के अपने कुछ फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं. हर व्यक्ति अपनी जरूरतों के हिसाब से कुछ अहम मुद्दों को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है. 

रेडी टू मूव फ्लैट खरीदें या अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी दोनों के फायदे जानकर तय करें कौन-सा विकल्प बेहतर
हाइलाइट्सरेडी टू मूव अपार्टमेंट के पजेशन यानी कब्जे में कोई देरी नहीं होती है. अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी के पजेशन में देरी से खरीदारों को परेशानी होती है.दोनों तरह की प्रॉपर्टी की कीमत, सुविधाओं और अन्य फैक्टर्स में बड़ा अंतर होता है. नई दिल्ली. घर या फ्लैट खरीदने से पहले हर व्यक्ति एक कंफ्यूजन में रहता है कि रेडी टू मूव प्रॉपर्टी खरीदें या अंडर कंस्ट्रक्शन. पिछले कुछ वर्षों में कई कारणों बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट्स अटके पड़े हैं और घर खरीदारों की पूंजी इसमें फंस गई. ऐसे में ना घर मिल रहा है ना पैसा. रेडी टू मूव यानी पूर्ण रूप से तैयार प्रॉपर्टी की कीमत निर्माणाधीन फ्लैट से ज्यादा होती है. हालांकि, इन दोनों तरह के विकल्पों के अपने कुछ फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं. रेडी टू मूव और अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी में निवेश को लेकर किसी के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं होता है. दरअसल दोनों विकल्प खरीदार की जरूरत और परिस्थितियों के आधार पर उपयुक्त हो सकते हैं. यदि आप भी इस दुविधा में फंस गए हैं तो इससे जुड़ी बेहतर समझ के लिए कुछ पहलुओं पर गौर करके बेहतर निर्णय ले सकते हैं. सबसे बड़ा और अहम फैक्टर आम तौर पर एक समान आकार और सुविधाओं के साथ मिलने वाली रेडी टू मूव और अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी की कीमत में बड़ा अंतर होता है. निर्माणाधीन अपार्टमेंट की तुलना में रेडी टू मूव अपार्टमेंट की लागत 10 से 30 प्रतिशत ज्यादा होती है. इस वजह से घर खरीदार या निवेश के उद्देश्य से लोग अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स ज्यादा प्राथमिकता देते हैं. ये भी पढ़ें- प्रॉपर्टी पर लोन लेने से पहले इन बातों की कर लें पूरी पड़ताल, नहीं होगा नुकसान मान लीजिये अगर कोई सर्व सुविधायुक्त रेडी-टू-मूव-इन-अपार्टमेंट 75 लाख में मिल रहा है लेकिन इस तरह का अंडर कंस्ट्रक्शन फ्लैट आपको निर्माण की अलग-अलग स्टेज के दौरान 50 लाख से लेकर 65 लाख रुपये तक मिल सकता है. क्योंकि जैसे-जैसे प्रॉपर्टी बनकर तैयार होती है रेट्स बढ़ते जाते हैं. समय का महत्व रेडी टू मूव अपार्टमेंट के पजेशन यानी कब्जे में कोई देरी नहीं होती है. घर खरीदने के बाद आप तुरंत वहां शिफ्ट हो सकते हैं. लेकिन अगर आप निर्माणाधीन अपार्टमेंट खरीदते हैं तो इसका पजेशन तय समय पर मिल जाएगा यह थोड़ा मुश्किल होता है. ये भी पढ़ें- लॉन्ग टर्म में सोने का अंडा देने वाली मुर्गी है रियल एस्टेट, कहां निवेश पर मिलेगा बेस्ट रिटर्न? हालांकि, 2016 में रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम के आने के बाद पजेशन से जुड़े नियमों में सुधार हुआ है, लेकिन फिर भी यदि आप मन की शांति चाहते हैं और देरी के जोखिम से बचना चाहते हैं, तो आपको तैयार रेडी टू मूव अपार्टमेंट चुनना चाहिए. सुविधाओं से जुड़े सवाल जब भी आप रेडी टू मूव फ्लैट खरीदते हैं तो इस बात से वाकिफ होते हैं कि घर और सोसइटी में क्या सुविधाएं मिल रही है. कंस्ट्रक्शन क्वालिटी, लोकेशन और पड़ोसियों की जानकारी रहती है. लेकिन अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी में यह संभव नहीं है, क्योंकि किसी हाउसिंग प्रोजेक्ट को तैयार होने में 2 से 3 साल लगते हैं. रेंट और EMI से जुड़ी चिंताएं अगर आप किराये के मकान में रहते हैं और लोन लेकर रेडी-टू-मूव-इन प्रॉपर्टी खरीदते हैं, तो आपको रेंट से तत्काल राहत मिलती है और किराया ईएमआई में तब्दील हो जाता है. लेकिन निर्माणाधीन फ्लैट में ऐसा नहीं होता है, क्योंकि इसके पजेशन में टाइम लगता है इसलिए आपको किराया देना जारी रखना पड़ता है. वहीं, होम लोन पर ब्याज शुरू हो जाता है. ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें jharkhabar.com हिंदी| आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट jharkhabar.com हिंदी| Tags: Indian real estate sector, Keep these things in mind before buying your own flat, Real estate marketFIRST PUBLISHED : November 05, 2022, 12:36 IST
Note - Except for the headline, this story has not been edited by Jhar Khabar staff and is published from a syndicated feed